Wednesday, January 30, 2019

गूगल नही होता तो क्या होता?

आज गूगल की वजह से लोगों की रचनात्मकता और मौलिकता समाप्त । इसका मुख्य कारण गूगल पर अत्याधिक आश्रित हो जाना है। ये बात चाहे थोड़ी कड़वी लगे लेकिन सच्चाई यही है कि गूगल हमारे दिमाग को धीरे-धीरे कमजोर बना रहा है, हमें कुछ भी जानना हो चाहे कितनी छोटी से छोटी या बड़ी से बड़ी चीज़ क्यों न हो…हम बस जल्दी से गूगल कर लेते हैं।
ऐसी कितनी ही छोटी-छोटी बातें हैं जो अब हम याद नहीं रख पाते, जनरल नॉलेज की बातें, जो फैक्ट्स एंड फिगर्स हम पहले बचपन में कंठस्थ याद किये रहते थे वो तो सब कब का भूल गए, अब कोई ये भी पूछ ले अगर की ब्राजील का राजधानी क्या है, तो हममे से कितने लोग हैं जो सबसे पहले गूगल का ही रुख करते हैं...इन सब लोगों की श्रेणी में मैं भी आती हूँ, मुझे भी ऐसी कितनी ही छोटी छोटी बातें याद नहीं.. या कितने ही हिंदी शब्द हैं जिनका अर्थ मुझे नहीं मालूम, अगर कोई ये बातें पूछ दे तो हम सीधा गूगल की तरफ अपना रुख कर लेते हैं!!
एक अमेरिकी शोध द्वारा ये पता चला है कि असल में गूगल के इतने ज्यादा वृहत इस्तेमाल के कारण हम चीज़ों को आसानी से भूलने लगे हैं और फैक्ट्स याद करने की क्षमता धीरे-धीरे कम होती जा रही है! पहले अगर कोई जानकारी चाहिए होती थी तो आपको कोई मैग्जीन या किताब की मदद लेनी पड़ती थी और उस जानकारी को खोज निकलने के लिए पूरी किताब पढनी पड़ती थी। परन्तु अब ऐसा नहीं होता..जो भी चाहिए वो मिनट में हासिल हो जाता है हाँ ये तो बात है ही कि इस गूगल से हमारा बहुमूल्य समय बचता है और काम भी फटाफट हो जाता है!
लेकिन इस गूगल के ऐसे इस्तेमाल से कहीं न कहीं हम परम्परागत पढ़ने की शैली भूलते जा रहे हैं! हमारे बहुत से बड़े बुजुर्ग ऐसे हैं जिनकी तथ्यों को याद रखने की क्षमता आज भी हमसे से कहीं ज्यादा है, वो इसलिए भी है शायद कि उनकी पढाई की शैली पारंपरिक थी, किताबें ही एक माध्यम थी जानकारी लेने के लिए, इंटरनेट का नाम तक किसी ने सुना नहीं था।
इस बात से बिलकुल इनकार नहीं है कि गूगल जानकारी लेने के लिए बहुत उपयोगी है लेकिन हमें सिर्फ इसी पे आश्रित नहीं रहना चाहिए! कहीं न कहीं कुछ तो हानि है ही गूगल पे इतना ज्यादा आश्रित होने में, अगर ऐसा ही हाल रहा और हम ऐसे ही आश्रित रहे गूगल पे तो जरा सोचिये कि आने वाली जनरेशन पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, एक तो वैसे ही आज के कुछ आधुनिक बच्चे अपने देश के इतिहास के बारे में कम और दूसरे देश के बारे में ज्यादा जानते हैं, अपने देश के शहीदों से ज्यादा उनके पास जानकारी माइकल जैक्सन की है, ऐसे में अगर हम गूगल पे इसी तरह आश्रित रहे तो शायद ये एक गलत बात ही होगी!
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